The 2-Minute Rule for hindi kahani moral

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अगले दिन जब वह पुनः दूध रखने गया तो कटोरे में स्वर्ण मुद्रा देख चकित रह गया। स्वर्ण मुद्रा देख उसका मन में लोभ आ गया और वह सोचने लगा अवश्य ही इस बिल के भीतर स्वर्ण कलश है। क्यों ना में इसे खोदकर समस्त स्वर्ण मुद्राएँ एक साथ प्राप्त कर धनवान हो जाऊं। 

इसके बाद राजा ने सभा में पहुंचे दुकानदार से पूछा की क्या आपने अपने पडोसी को चोरी करते हुए देखा था। दुकानदार ने जवाब दिया की हां मैंने इसे रात में चोरी करते हुए देखा था। 

शिक्षा –सत्य और न्याय की हमेशा जीत होती है।

बहुत दिन पहले की बात है, पास के जंगल में एक भूखा गधा उदास रो रहा था। दिन भर के काम के बाद, उसके मालिक ने उसे ठीक से नहीं खिलाया था, इस कारण से वो उदास रो रहा था। 

वह तत्काल अपने गांव जाकर एक मिट्टी के ek kisan ki kahani कटोरे में दूध ले आया। उसने वह कटोरा सर्प के बिल के बाहर रखा और बोला, हे सर्प देव! अब तक मैंने आपकी पूजा अर्चना नहीं की क्योंकि मुझे आपके विषय में ज्ञात नहीं था। आप मुझे इस दृष्टता के लिए क्षमा करें। अब से मैं प्रतिदिन आपकी पूजा करूंगा। मुझ पर कृपा करें और मेरा जीवन समृद्ध करें। 

लेकिन अब दुसरो के भलाई के बारे में सोचने लगे हो तो ईश्वर भी अब तुम्हारे इस नेक कार्य में तुम्हारा साथ देते है यानी हम सभी ईश्वर को कोसते तो जरुर है लेकिन ईश्वर के बताये मार्ग पर चल नही सकते, ईश्वर से पाने के लिए हर कोई इच्छा तो रखता जरुर है लेकिन पहले ईश्वर के आशीर्वाद पाने के लिए खुद को वैसा बनाना पड़ता है यानी हम जैसा करते है हमारे कर्मो के अनुसार ही हमारे भाग्य का निर्धारण होता है”

एक निर्धन धोबी था। उसके पास एक गधा था। गधा काफी कमजोर था. क्योंकि उसे बहुत कम खाने को मिलता था।

अगले दिन फिर यही घटना दोहराई गई। मोहन फिर सेठ के आंगन में बैठा था सेठ ने फिर उसको वहां से जाने के लिए कहा। यही घटना अगले कई दिनों तक चलती रही। अब तो मोहन सेठ के हकाल ने पर भी वहां से नहीं जाता था और वहीं पर बैठा रहता था।

इस पर उसकी मां रमेश को अपने साथ लेकर गांव चली गई।

धोबी ने तुरंत अपनी योजना पर अमल कर डाला। उसकी योजना काम कर गई।

पत्नी घर के काम करती थी और बच्चे स्कूल जाते थे। राम सुबह-सुबह उठकर खेत जाता था और देर शाम तक काम करता था। 

मोहन के पास ज्यादा जमीन नहीं थी लेकिन जितनी भी थी उसमें वह बड़ी मेहनत करता और अपने परिवार का पेट पालने लायक अनाज उगा लेता था। बाकी के किसान भी यह देखकर हैरान रह जाते कि कोई कैसे इतनी सी जमीन में इतना ज्यादा फसल उगा सकता है।

एक बड़ा सा राजमहल था, जिसके द्वार पर एक साधु आया और वो साधु द्वारपाल से आकर कहने लगा कि अंदर जाकर राजा से कहो कि उनका भाई उनसे मिलने आया है। द्वारपाल सोचने लग गया कि ये साधु के भेस में राजा से कौन मिलने आया है जो राजा को अपना भाई बता रहा है। फिर द्वारपाल ने समझा कि क्या पता कोई दूर का रिश्तेदार हो जिसने सन्यास ले लिया हो। द्वारपाल ने अंदर जाकर सूचना दी जिसके बाद राजा मुस्कुराने लगे और उन्होंने कहा कि साधु को अंदर भेज दो।

उसकी जमीन बहुत छोटी थी और उससे वह अपने परिवार का गुजारा नहीं कर पाता था। उसकी पत्नी और दो बच्चे थे। 

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