A Review Of kahaniya

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हिंदी कहानियां इतने अच्छे तरीके से बहुत कम लोग लिखते हैं इंटरनेट पर. आप उनमें से एक है और काफी सक्षम है.

कैकेयी राम के लिये खुद को भी भूल गयी। दिन हो या रात, कैकेयी का एक ही काम,राम की चिंता।

मगर आपने मेरा नाम नहीं लिया क्या मुझे भी अपने माता-पिता को बुलाकर लाना है?

कुछ समय बाद मदन के पिताजी उनसे मिलने शहर आए।

कभी पार्क में बैठते, कभी जाकर कहीं खाना-पीना करते, और कभी फिल्म देखा करते थे।

पोता खूब मन लगाकर उन कहानियों को सुनता। उस नन्हे से पोते का नाम श्याम था। घर में महंगे महंगे चीनी – मिट्टी और अन्य क्रोकरी के समान थे।

व्यक्ति को कभी हताश नहीं होना चाहिए परिस्थितिया विपरीत क्यों न हो उसको अपने अनुकूल बनाना चाहिए। जब परिस्थितियां अनुकूल नहीं होती तभी व्यक्ति अपने आप को निकाल सकता है।

सन्यासियों का स्नेह और शोक दोनों ही विश्व कल्याण के लिये ही होते हैं।

सिर्फ आठ साल की तो थी चीनू, और कितनी बड़ी बात कह गई थी।

यह सुनकर बंदर हँसने लगा। गिलहरी भी पूँछ को छोड़कर पेड़ की डाली पर चढ़कर बंदर के साथ बैठ गई और दोनों की गहरी दोस्ती हो गई।

जब हम हिंदी कहानियां सुनते थे तो हम एक काल्पनिक दुनिया में चले जाते थे, जो आज भी हमें बचपन के मधुर stories for bedtime होने की याद दिलाता है।

इसलिए राजा ने उत्तराधिकारी के लिए तीनों की परीक्षा लेने का फैसला किया।

यह सुन कर सभी लोगों की सांसे रुकी की रुकी रह गई। सभी ने एक दूसरे को देखा। सन्यासी ने परिवार के सभी सदस्यों से एक एक कर पूछा पर किसी ने भी हां नहीं कहा।

"मम्मी मैं बड़े भाइयों जितना काबिल नहीं हूँ।

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