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एक बार गर्मी के दिन गांव में भयंकर सूखा पड़ा और रामू की फसलें सूख गई, जिससे उसके पास काटने के लिए कुछ नहीं बचा। व्यथित रामू को नहीं पता था कि वह आने वाले कठिन समय से कैसे बचेगा।
वह अपनी जमीन से अनाज उगाता था और उसे बेचकर अपने परिवार का गुजारा करता था। लेकिन उसकी आमदनी बहुत कम थी।
उन सभी छल और कपट करने वाले दोस्तों को छोड़कर अपनी पढ़ाई में ध्यान लगाया। नतीजा यह हुआ कि साल भर की मेहनत से वह परीक्षा में सफल ही नहीं अपितु विद्यालय में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। इस पर उसके माता-पिता को बहुत खुशी हुई है और अपने पुत्र श्याम को गले से लगाया उन्हें शाबाशी दी।
मूर्ख चोर ने अपनी छड़ी को दो इंच छोटा कर दिया था क्योंकि उसे लगा कि यह सच में दो इंच बढ़ जाएगी। इस प्रकार बीरबल सेन बहुत ही चतुरायी से असली चोर को पकड़ लिया।
सेठ को मोहन का पता नहीं मालूम था इसलिए अड़ोस पड़ोस के अन्य किसानों से पूछ ने पर पता चला की मोहन घायल हो hindi kahaniya moral stories चुका है और अपने घर पर आराम कर रहा है।
बहुत पहले की बात है। एक बार, एक अमीर व्यापारी बीरबल से मदद मांगने के लिए राजा अकबर के दरबार में आया। उस व्यापारी के कुछ सामान की चोरी हो गयी थी। अब उस व्यापारी को ये शक था कि उसके किसी नौकर ने उसे लूट लिया है। लेकिन चूँकि उसके बहुत से नौकर थे इसलिए वो असली चोर को पकड़ नहीं पा रहा था।
किसान के मन में हुआ कि भले ही हम भूखे हैं, लेकिन अपने अतिथि को भूखा नहीं रख सकते। अब किसान यह सोच सोचकर बेचैन हो गया कि अपने अतिथि का पेट कैसे भरा जाए। तभी उसने घर के सामने वाली दुकान से चावल चुराने की तरकीब सोची। उसने सिर्फ आतिथि के लिए ही दो मुट्ठी चावल लिया और उसे पकाकर राजा को खिला दिया।
एक दिन की बात है दोपहर का समय था किसान खेतो से आकर अपने घर पर अपनी पत्नी के साथ खाना खाने जा रहा था की इतने में एक साधू महाराज भिक्षा मागते हुए उसके दरवाजे पर पहुचे और भिक्षा मागने लगे तो इतने में किसान घर के बाहर आया और बोला “साधू महाराज हम सभी पहले से इतने गरीब है और किसी तरह अपना जीवन गुजार रहे है और ऐसे में हम आपको कहा से दान दे, हमारा साथ तो ऊपर वाला भी छोड़ चुका है”
मदन उड़ीसा के एक छोटे से गांव में पला-बढ़ा। पढ़ लिखकर वह एक अच्छी सी नौकरी करने लगा। नौकरी में लगातार हुए प्रमोशन से उसे खूब तरक्की और शोहरत की प्राप्ति हुई। वह अब शहर में रहने लगा , वहां मदन को ग्यारहवीं मंजिल पर एक आलीशान फ्लैट कंपनी के द्वारा मिला। मदन अपनी पत्नी को एक बच्चे के साथ खूब ऐसो आराम से रहने लगा।
उसकी माँ एक अकेली माँ थी और वह गीता और उसके छोटे भाई-बहनों का पालन-पोषण करती थी।
लोमड़ी तो जल्दी-जल्दी खिचड़ी खाने लगी, लेकिन सारस की लम्बी चोंच में खिचड़ी ना आई। उसे खिचड़ी ना खाते देख लोमड़ी मन ही मन बहुत खुश हुई और झूठी चिंता दिखाते हुए सारस से पूछने लगी कि क्या बात है तुम्हे पसंद नहीं आया?
वहां दादी की तबीयत खराब है, और हॉस्पिटल में है।
शिक्षा – जब कोई आपको किसी समस्या के बारे में चेतावनी देता है, तब ऐसे में उनकी बातों को समझदारी से सुनना और उसके ऊपर कार्य करना महत्वपूर्ण होता है। रोकथाम इलाज से बेहतर है!
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